श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  4.68.5-6 
विसर्जयामास तदा द्विजांश्च प्रकृतीस्तथा।
तथा स राजा मत्स्यानां विराटो वाहिनीपति:॥ ५॥
उत्तरं परिपप्रच्छ क्व यात इति चाब्रवीत्।
आचख्युस्तस्य तत् सर्वं स्त्रिय: कन्याश्च वेश्मनि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मत्स्य देश के राजा और सेनाओं के स्वामी विराट ने ब्राह्मणों और प्रजा को विदा कर दिया और (भीतर के महल में जाकर) उत्तर के विषय में पूछा कि, ‘राजकुमार उत्तर कहाँ गया है?’ तब घर में रहने वाली स्त्रियों और कन्याओं ने उनसे सब बातें कह सुनाईं-॥5-6॥
 
Thereafter, Virat, the king of Matsya country and the lord of the armies, sent the brahmins and the subjects away and asked about Uttar (going into the inner palace), 'Where has Prince Uttar gone?' Then the women and girls living in the house told him everything -॥ 5-6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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