यस्य बाहुबले तुल्यो न भूतो न भविष्यति।
अतीव समरं दृष्ट्वा हर्षो यस्योपजायते॥ ४३॥
योऽजयत् सङ्गतान् सर्वान् ससुरासुरमानवान्।
तादृशेन सहायेन कस्मात् स न विजेष्यते॥ ४४॥
अनुवाद
शारीरिक बल में उसकी बराबरी करनेवाला न तो कभी कोई हुआ है और न कभी होगा, जो युद्ध का अवसर आने पर अत्यंत प्रसन्न होता है, जिसने युद्ध के लिए एकत्रित हुए समस्त देवताओं, दानवों और मनुष्यों को जीत लिया है, वह राजकुमार बृहन्नला जैसी सहायक होने पर विजयी कैसे न होगा ?॥ 43-44॥
There has never been and never will be anyone who can equal him in physical strength, who feels extremely happy when the opportunity of battle arrives, who has conquered all the gods, demons and humans gathered for the war, how will the prince not be victorious if he has a helper like Brihannala?॥ 43-44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥