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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना
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श्लोक 38
श्लोक
4.68.38
इत्युक्त: कुपितो राजा मत्स्य: पाण्डवमब्रवीत्।
समं पुत्रेण मे षण्ढं ब्रह्मबन्धो प्रशंससि॥ ३८॥
अनुवाद
यह सुनकर मत्स्यराज क्रोधित हो उठे और पाण्डुपुत्र से बोले - 'हे दुष्ट ब्राह्मण! तू मेरे पुत्र जैसे नपुंसक की प्रशंसा कर रहा है!॥ 38॥
On hearing this, the King of Matsya became furious and said to the son of Pandu - 'You wicked Brahmin! You are praising a eunuch like my son!॥ 38॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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