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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना
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श्लोक 37
श्लोक
4.68.37
ततोऽब्रवीन्महात्मा स एनं राजा युधिष्ठिर:।
बृहन्नला यस्य यन्ता कथं स न जयेद् युधि॥ ३७॥
अनुवाद
तब महात्मा राजा युधिष्ठिर ने विराट से कहा - 'जिसका सारथि बृहन्नला हो, वह युद्ध कैसे न जीत सकता है?' 37॥
Then Mahatma King Yudhishthir said to Virat - 'How can one whose charioteer is Brihannala not win the war?' 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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