श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  4.68.36 
वैशम्पायन उवाच
प्रवर्तमाने द्यूते तु मत्स्य: पाण्डवमब्रवीत्।
पश्य पुत्रेण मे युद्धे तादृशा: कुरवो जिता:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं, 'हे जनमेजय! जुआ खेलना शुरू हो गया है। खेलते समय मत्स्यराज ने पाण्डुपुत्र से कहा, 'देखो, आज मेरे पुत्र ने युद्ध में उन यशस्वी कौरवों को जीत लिया है।'
 
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! The game of gambling has begun. While playing, the king of the Matsyas said to the son of Pandu, 'Look, today my son has won over those famous Kauravas in battle.'
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd