| श्री महाभारत » पर्व 4: विराट पर्व » अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना » श्लोक 32 |
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| | | | श्लोक 4.68.32  | विराट उवाच
स्त्रियो गावो हिरण्यं च यच्चान्यद् वसु किञ्चन।
न मे किञ्चित् त्वया रक्ष्यमन्तरेणापि देवितुम्॥ ३२॥ | | | | | | अनुवाद | | विराट बोले - स्त्रियाँ, गौएँ, स्वर्ण और जो भी धन सुरक्षित रखा हुआ है, वह सब मुझे जुए के बिना नहीं चाहिए। (जुआ खेलना मेरा प्रिय है)॥32॥ | | | | Virata said, "Women, cows, gold and any other wealth that is kept safe, I do not want any of it without gambling. (Gambling is my favourite)॥ 32॥ | | ✨ ai-generated | | |
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