श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  4.68.23-24 
राजमार्गा: क्रियन्तां मे पताकाभिरलंकृता:।
पुष्पोपहारैरर्च्यन्तां देवताश्चापि सर्वश:॥ २३॥
कुमारा योधमुख्याश्च गणिकाश्च स्वलंकृता:।
वादित्राणि च सर्वाणि प्रत्युद्यान्तु सुतं मम॥ २४॥
 
 
अनुवाद
मेरे नगर की सड़कें पताकाओं से सजी हों। सभी देवताओं की पूजा पुष्पों और विविध उपहारों से की जाए। मेरे पुत्र के स्वागत के लिए राजकुमारों, प्रमुख योद्धाओं, सुसज्जित गणिकाओं और सभी प्रकार के वाद्य यंत्रों को भेजा जाए।
 
‘The streets of my city should be decorated with banners. All the gods should be worshipped with flowers and various gifts. Princes, chief warriors, decorated courtesans and all kinds of musical instruments should be sent to welcome my son.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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