vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना
»
श्लोक 17
श्लोक
4.68.17
वैशम्पायन उवाच
अथोत्तरेण प्रहिता दूतास्ते शीघ्रगामिन:।
विराटनगरं प्राप्य विजयं समवेदयन्॥ १७॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन्! इसी समय उत्तर दिशा से भेजे हुए वेगशाली दूत विराटनगर में आये और विजय का समाचार सुनाया।
Vaishmpayana says - King! At this very time, the swift messengers sent from the north arrived at Viratnagar and informed about the victory.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×