श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.68.17 
वैशम्पायन उवाच
अथोत्तरेण प्रहिता दूतास्ते शीघ्रगामिन:।
विराटनगरं प्राप्य विजयं समवेदयन्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन्! इसी समय उत्तर दिशा से भेजे हुए वेगशाली दूत विराटनगर में आये और विजय का समाचार सुनाया।
 
Vaishmpayana says - King! At this very time, the swift messengers sent from the north arrived at Viratnagar and informed about the victory.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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