एवं स राजा मत्स्यानां विराटो वाहिनीपति:।
व्यादिदेशाथ तां क्षिप्रं वाहिनीं चतुरङ्गिणीम्॥ १३॥
कुमारमाशु जानीत यदि जीवति वा न वा।
यस्य यन्ता गत: षण्ढो मन्येऽहं स न जीवति॥ १४॥
अनुवाद
इस प्रकार सेनाओं के स्वामी मत्स्यराज विराट ने अपनी चतुरंगिणी सेना को शीघ्र आदेश दिया कि 'जाओ और शीघ्रता से पता लगाओ कि राजकुमार जीवित है या नहीं। मेरा विचार है कि जो नपुंसक उसका सारथी बनकर गया है, वह अब जीवित नहीं होगा।'॥13-14॥
In this manner, the lord of the armies, Matsya King Virat, quickly ordered his four-fold army, 'Go and find out quickly whether the prince is alive or not. I think that the eunuch who has gone as his charioteer will not be alive now.'॥ 13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥