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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना
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श्लोक 11
श्लोक
4.68.11
तस्माद् गच्छन्तु मे योधा बलेन महता वृता:।
उत्तरस्य परीप्सार्थं ये त्रिगर्तैरविक्षता:॥ ११॥
अनुवाद
इसलिए मेरे जो सैनिक त्रिगर्तों के साथ युद्ध में घायल नहीं हुए हैं, वे एक विशाल सेना के साथ राजकुमार उत्तर की रक्षा के लिए चलें।'
Therefore those of my soldiers who have not been injured in the war with the Trigartas should go with a huge army to protect Prince Uttar.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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