श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 68: राजा विराटकी उत्तरके विषयमें चिन्ता, विजयी उत्तरका नगरमें प्रवेश, प्रजाओंद्वारा उनका स्वागत, विराटद्वारा युधिष्ठिरका तिरस्कार और क्षमा-प्रार्थना एवं उत्तरसे युद्धका समाचार पूछना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.68.10 
सर्वथा कुरवस्ते हि ये चान्ये वसुधाधिपा:।
त्रिगर्तान् नि:सृताञ्छ्रुत्वा न स्थास्यन्ति कदाचन॥ १०॥
 
 
अनुवाद
कौरव हों या कोई अन्य राजा, जब वे सुनेंगे कि त्रिगर्त लोग युद्ध में पीठ दिखाकर भाग गए हैं, तब वे यहाँ कभी नहीं रह सकेंगे।॥10॥
 
Be it the Kauravas or any other king, when they will hear that the Trigarta people have turned their backs and fled in the war, then they will never be able to stay here.'॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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