उत्तर उवाच
यत् ते कृतं कर्म न पारणीयं
तत् ते कर्म कर्तुं मम नास्ति शक्ति:।
न त्वां प्रवक्ष्यामि पितु: सकाशे
यावन्न मां वक्ष्यसि सव्यसाचिन्॥ ११॥
अनुवाद
उत्तरा बोली - सव्यसाची! आपने जो पराक्रम किया है, वह किसी और के लिए असम्भव है। मुझमें ऐसा महान् कार्य करने की शक्ति नहीं है; तथापि जब तक आप मुझे अनुमति नहीं देंगे, मैं आपके विषय में अपने पिता से कुछ नहीं कहूँगी। 11.
Uttara said - Savyasachi! The feat you have performed is impossible for anyone else. I do not have the strength to perform such a great deed; however, until you give me permission, I will not say anything about you to my father. 11.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥