श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 66: अर्जुनके द्वारा समस्त कौरवदलकी पराजय तथा कौरवोंका स्वदेशको प्रस्थान  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.66.30 
देवास्तु दृष्ट्वा महदद्‍भुतं तद्
युद्धं कुरूणां सह फाल्गुनेन।
जग्मुर्यथास्वं भवनं प्रतीता:
पार्थस्य कर्माणि विचिन्तयन्त:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
कौरवों और अर्जुन का अद्भुत युद्ध देखकर देवतागण बहुत प्रसन्न हुए और अर्जुन के पराक्रम का स्मरण करते हुए अपने-अपने घर चले गए॥30॥
 
Seeing the wonderful fight between the Kauravas and Arjuna, the gods became very happy and went to their respective homes remembering the bravery of Arjuna. 30॥
 
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि समस्तकौरवपलायने षट्षष्टितमोऽध्याय:॥ ६६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें समस्त कौरवोंके पलायनसे सम्बन्ध

रखनेवाला छाछठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६६॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)