श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 66: अर्जुनके द्वारा समस्त कौरवदलकी पराजय तथा कौरवोंका स्वदेशको प्रस्थान  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  4.66.26-27h 
द्रौणिं कृपं चैव कुरूंश्च मान्या-
ञ्छरैर्विचित्रैरभिवाद्य चैव॥ २६॥
दुर्योधनस्योत्तमरत्नचित्रं
चिच्छेद पार्थो मुकुटं शरेण।
 
 
अनुवाद
तदनन्तर पार्थ ने अश्वत्थामा, कृपाचार्य तथा अन्य माननीय कौरवों (बाह्लिक, सोमदत्त आदि) को विचित्र प्रकार से प्रणाम करके एक बाण मारकर दुर्योधन का सुन्दर रत्नजड़ित विचित्र मुकुट काट डाला। 26 1/2॥
 
Then, after saluting Ashwatthama, Kripacharya and other honorable Kauravas (Bahlika, Somdatta etc.) in a strange manner, Partha shot one arrow and cut off the strange crown studded with beautiful gems of Duryodhana. 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)