श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 66: अर्जुनके द्वारा समस्त कौरवदलकी पराजय तथा कौरवोंका स्वदेशको प्रस्थान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.66.16 
ततोऽन्वशासच्चतुर: सदश्वान्
पुत्रो विराटस्य हिरण्यकक्षान्।
ते तद् व्यतीयुर्ध्वजिनामनीकं
श्वेता वहन्तोऽर्जुनमाजिमध्यात्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् विराटकुमार ने सुवर्णमय आभूषणों से विभूषित उन चार सुन्दर घोड़ों को हांका। वे श्वेत घोड़े अर्जुन को रथ में लेकर युद्धभूमि के मध्य से होते हुए, ध्वजधारी रथियों की सेना के घेरे को पार करके बाहर पहुँच गए॥16॥
 
Thereafter Viratkumar drove those four beautiful horses adorned with golden ornaments. Those white horses carrying Arjuna in the chariot crossed the centre of the battlefield and crossed the circle of the flag bearing army of charioteers and reached outside.॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)