श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 66: अर्जुनके द्वारा समस्त कौरवदलकी पराजय तथा कौरवोंका स्वदेशको प्रस्थान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.66.1 
वैशम्पायन उवाच
आहूयमानश्च स तेन संख्ये
महात्मना वै धृतराष्ट्रपुत्र:।
निवर्तितस्तस्य गिराङ्कुशेन
महागजो मत्त इवाङ्कुशेन॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: 'हे जनमेजय! जब महाबली अर्जुन ने उसे इस प्रकार युद्ध के लिए ललकारा, तब धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन उसके कठोर वचनों से पीड़ित होकर, अंकुश से पीडि़त होकर पीछे हट गया।
 
Vaishmpayana says: 'O Janamejaya! When the great Arjuna challenged him to a battle in this manner, then Duryodhan, son of Dhritarashtra, being afflicted by the goad of his harsh words, turned back like a mad elephant struck by a goad.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)