न ते पुरस्तादथ पृष्ठतो वा
पश्यामि दुर्योधन रक्षितारम्।
अपेहि युद्धात् पुरुषप्रवीर
प्राणान् प्रियान् पाण्डवतोऽद्य रक्ष॥ १८॥
अनुवाद
दुर्योधन! मुझे तो न तो तुम्हारे आगे कोई रक्षक दिखाई दे रहा है, न पीछे। अतः हे वीर! युद्ध से भाग जाओ और आज पाण्डुपुत्र अर्जुन के हाथों से अपने प्राण बचाओ।
Duryodhan! Well, I don't see any protector in front of you or behind you. So, brave man! Run away from the battle and save your dear life today from the hands of Pandu's son Arjun.
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि दुर्योधनापयाने पञ्चषष्टितमोऽध्याय:॥ ६५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें दुर्योधनका युद्धसे पलायनविषयक पैंसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)