श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 65: अर्जुन और दुर्योधनका युद्ध, विकर्ण आदि योद्धाओंसहित दुर्योधनका युद्धके मैदानसे भागना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.65.17 
मोघं तवेदं भुवि नामधेयं
दुर्योधनेतीह कृतं पुरस्तात्।
न हीह दुर्योधनता तवास्ति
पलायमानस्य रणं विहाय॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी पर तुम्हारा नाम व्यर्थ ही दुर्योधन पड़ा है। तुम युद्ध से भाग रहे हो; इसलिए दुर्योधन नाम के अनुरूप तुममें कोई गुण नहीं है। ॥17॥
 
In vain you have been named Duryodhana on this earth. You are running away from the war; hence you do not have any qualities to match the name Duryodhana. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)