श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 65: अर्जुन और दुर्योधनका युद्ध, विकर्ण आदि योद्धाओंसहित दुर्योधनका युद्धके मैदानसे भागना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.65.14 
तं भीमरूपं त्वरितं द्रवन्तं
दुर्योधनं शत्रुसहोऽभिषङ्गात्।
प्रास्फोटयद् योद्धुमना: किरीटी
बाणेन विद्धं रुधिरं वमन्तम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस समय दुर्योधन का रूप भयानक हो रहा था। बाण से घायल होकर वह पराजित होकर रक्त-वमन करता हुआ भाग रहा था। यह देखकर किरीटधारी और शत्रुओं के आक्रमण को सहन करने में समर्थ अर्जुन ताली बजाने लगे और हृदय में युद्ध के लिए उत्साह उत्पन्न करके शत्रुओं को ललकारने लगे॥14॥
 
At that time, Duryodhan's appearance was becoming terrifying. Defeated and wounded by an arrow, he was running away vomiting blood. Seeing this, Arjuna, who was wearing a crown and was able to withstand the onslaught of the enemy, started clapping his hands and with enthusiasm for the battle in his heart, he started challenging the enemy.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)