श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 65: अर्जुन और दुर्योधनका युद्ध, विकर्ण आदि योद्धाओंसहित दुर्योधनका युद्धके मैदानसे भागना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.65.13 
दृष्ट्वैव पार्थेन हतं च नागं
योधांश्च सर्वान् द्रवतो निशम्य।
रथं समावृत्य कुरुप्रवीरो
रणात् प्रदुद्राव यतो न पार्थ:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर कि अर्जुन के द्वारा हाथीराज मारा गया है और सब योद्धा युद्धभूमि से भाग रहे हैं, कुरुवंश का प्रधान योद्धा दुर्योधन भी अपना रथ मोड़कर उस दिशा में भाग गया, जिधर अर्जुन नहीं था॥13॥
 
Seeing that the king of elephants had been killed by Arjuna and all the warriors were fleeing from the battlefield, Duryodhana, the chief warrior of the Kuru dynasty, also turned his chariot and fled in the direction where Arjuna was not.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)