श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुन और भीष्मका अद्‍भुत युद्ध तथा मूर्च्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.64.9 
ध्वजं चैवास्य कौन्तेय: शरैरभ्यहनद् भृशम्।
शीघ्रकृद् रथवाहांश्च तथोभौ पार्ष्णिसारथी॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तब कुन्तीपुत्र ने शीघ्रता से आगे बढ़कर अपने बाणों से उसकी ध्वजा को छेद डाला तथा रथ के घोड़ों, पार्श्वरक्षकों और सारथि को भी बुरी तरह घायल कर दिया।
 
Then Kunti's son moved quickly and pierced his flag with his arrows and also severely injured the chariot's horses, side guards and the charioteer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)