श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुन और भीष्मका अद्‍भुत युद्ध तथा मूर्च्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.64.7 
ते ध्वजं पाण्डुपुत्रस्य समासाद्य पतत्त्रिण:।
ज्वलन्तं कपिमाजघ्नुर्ध्वजाग्रनिलयांश्च तान्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वे बाण पाण्डवपुत्र अर्जुन की ध्वजा के पास पहुँचकर वहाँ बैठे हुए महातेजस्वी वानर तथा ध्वजा के अग्र भाग में रहने वाले अन्य प्राणियों को भी गहरे घाव पहुँचाने लगे॥7॥
 
Those arrows, reaching near the flag of Pandava son Arjuna, inflicted deep wounds on the illustrious monkey sitting there as well as the other creatures residing in the front part of the flag. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)