श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुन और भीष्मका अद्‍भुत युद्ध तथा मूर्च्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  4.64.47 
अथैनं दशभिर्बाणै: प्रत्यविध्यत् स्तनान्तरे।
यतमानं पराक्रान्तं कुन्तीपुत्रो धनंजय:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् विजय हेतु प्रयत्नशील कुन्तीपुत्र धनंजय ने महाबली भीष्म की छाती में दस बाण मारे, जिससे वे अत्यन्त घायल हो गये ॥47॥
 
Thereafter, Kunti's son Dhananjay, who was striving for victory, shot ten arrows into the chest of the mighty Bhishma, causing deep injury. 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)