श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुन और भीष्मका अद्‍भुत युद्ध तथा मूर्च्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  4.64.46 
तत: प्रहस्य बीभत्सु: पृथुधारेण कार्मुकम्।
चिच्छेद गार्ध्रपत्रेण भीष्मस्यादित्यतेजस:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
तब अर्जुन ने हँसते हुए एक मोटे किनारे वाले तथा गीध के पंख वाले बाण से सूर्य के समान तेजस्वी भीष्म के धनुष को पुनः काट डाला।
 
Then Arjuna, smiling, again cut off the bow of Bhishma, who was as radiant as the Sun, with an arrow having a thick edge and vulture's feathers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)