श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुन और भीष्मका अद्‍भुत युद्ध तथा मूर्च्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  4.64.45 
तत: शान्तनवो भीष्मो वामं पार्श्वमताडयत्।
पश्यत: प्रतिसंधाय विध्यत: सव्यसाचिन:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शान्तनुनन्दन भीष्म ने सव्यसाची अर्जुन के देखते-देखते (कौरव सेना को) घायल कर दिया था और अपने बाण से उसका वाम भाग छेद दिया॥45॥
 
Thereafter, Shantanunandan Bhishma, who had injured (Kauravas army) in the sight of Savyasachi Arjun, with his arrow, pierced his left side. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)