श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुन और भीष्मका अद्‍भुत युद्ध तथा मूर्च्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  4.64.44 
इत्युक्तो देवराजस्तु पार्थभीष्मसमागमम्।
पूजयामास दिव्येन पुष्पवर्षेण भारत॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! चित्रसेन की यह बात सुनकर देवराज इन्द्र ने अर्जुन और भीष्म के इस अद्भुत युद्ध के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए दिव्य पुष्पों की वर्षा की।
 
Janamejaya! Upon hearing Chitrasena say this, the king of gods Indra showered celestial flowers to show his respect for this wonderful battle between Arjuna and Bhishma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)