श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुन और भीष्मका अद्‍भुत युद्ध तथा मूर्च्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  4.64.41 
मध्यंदिनगतं सूर्यं प्रतपन्तमिवाम्बरे।
नाशक्नुवन्त सैन्यानि पाण्डवं प्रति वीक्षितुम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जैसे दोपहर के समय आकाश में अपनी प्रचण्ड किरणों से चमकते हुए सूर्यदेव को कोई नहीं देख सकता, उसी प्रकार कौरव सैनिक महाबली पाण्डुपुत्र की ओर आँख उठाकर देखने में भी असमर्थ हो गए हैं॥ 41॥
 
‘Just as no one can look at the Sun blazing with its intense rays in the sky at noon, similarly the Kaurava soldiers have become incapable of even raising their eyes to look at the mighty son of Pandu.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)