श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुन और भीष्मका अद्‍भुत युद्ध तथा मूर्च्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  4.64.40 
आददानस्य हि शरान् संधाय च विमुञ्चत:।
विकर्षतश्च गाण्डीवं नान्तरं समदृश्यत॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
‘अर्जुन कब बाण निकालता है, कब उसे भरता है, कब छोड़ता है और कब गाण्डीव धनुष खींचता है, इन क्रियाओं में क्या अन्तर है, यह कोई नहीं देख सका ॥40॥
 
‘Nobody could see when Arjuna takes out the arrow, when he loads it, when he releases it and when he draws the Gandiva bow and what is the difference in these actions.॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)