श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुन और भीष्मका अद्‍भुत युद्ध तथा मूर्च्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  4.64.37 
तं दृष्ट्वा परमप्रीतो गन्धर्वश्चित्रमद्‍भुतम्।
शशंस देवराजाय चित्रसेन: प्रतापवान्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उस समय अर्जुन को देखकर तेजस्वी चित्रसेन गन्धर्व अत्यन्त प्रसन्न हुए और उनके विचित्र एवं अद्भुत रणकौशल की प्रशंसा करते हुए देवराज इन्द्र से बोले-॥
 
At that time, the glorious Chitrasen Gandharva became very happy after seeing Arjun and said to Devraj Indra while praising his strange and amazing battle skills – ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)