श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुन और भीष्मका अद्‍भुत युद्ध तथा मूर्च्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  4.64.34 
ततो गाण्डीवनिर्मुक्ता निरमित्रं चिकीर्षव:।
आगच्छन् पुङ्खसंश्लिष्टा: श्वेतवाहनपत्रिण:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् श्वेत वाहन अर्जुन के गाण्डीव धनुष से छूटे हुए पंखयुक्त बाण संसार को शत्रुरहित करने की इच्छा से सर्वत्र आने लगे ॥34॥
 
Thereafter, the winged arrows of the white vehicle Arjuna, released from Gandiva's bow, started coming everywhere with the desire to make the world enemy-free. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)