श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुन और भीष्मका अद्‍भुत युद्ध तथा मूर्च्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  4.64.31 
अथावृणोद् दश दिश: शरैरतिरथस्तदा।
किरीटमाली कौन्तेय: शूर: शान्तनवस्तथा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
किरीटामालीपुत्र कुन्तीकुमार अर्जुन और शान्तनुनंदन भीष्म दोनों ही अत्यंत वीर योद्धा थे। उन्होंने अपने बाणों से दसों दिशाओं को आच्छादित कर दिया था।
 
Both Kuntikumar Arjun, the son of Kiritmaali, and Shantanu Nandan Bhishma were extremely brave warriors. They covered all the ten directions with their arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)