श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुन और भीष्मका अद्‍भुत युद्ध तथा मूर्च्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.64.2 
प्रगृह्य कार्मुकश्रेष्ठं जातरूपपरिष्कृतम्।
शरानादाय तीक्ष्णाग्रान् मर्मभेदान् प्रमाथिन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उसके हाथों में सोने से मढ़ा हुआ एक उत्तम धनुष और शत्रुओं को मथने वाले तीखे और भेदने वाले बाण थे॥2॥
 
He held in his hands an excellent bow adorned with gold and sharp and piercing arrows that could churn the enemies.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)