श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुन और भीष्मका अद्‍भुत युद्ध तथा मूर्च्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.64.18 
तत: कनकपुङ्खानां शरवृष्टिं समुत्थिताम्।
पाण्डवस्य रथात् तूर्णं शलभानामिवायतिम्।
व्यधमत् तां पुनस्तस्य भीष्म: शरशतै: शितै:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पाण्डुपुत्र अर्जुन के रथ से टिड्डियों के समान सुवर्ण पंखयुक्त बाणों की वर्षा होने लगी; किन्तु भीष्म ने सैकड़ों तीखे बाणों से उन्हें पुनः शांत कर दिया।
 
After this, a shower of golden-feathered arrows started from the chariot of Arjuna, son of Pandu, like a swarm of locusts; but Bhishma again silenced them with hundreds of sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)