श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 64: अर्जुन और भीष्मका अद्‍भुत युद्ध तथा मूर्च्छित भीष्मका सारथिद्वारा रणभूमिसे हटाया जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.64.17 
ततस्तानि निकृत्तानि शरजालानि भागश:।
समरे च व्यशीर्यन्त फाल्गुनस्य रथं प्रति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् युद्धभूमि में टुकड़े-टुकड़े हो चुके वे बाण अर्जुन के रथ पर बिखरने लगे।
 
Thereafter, those arrows, cut into pieces on the battlefield, began scattering on Arjuna's chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)