श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 62: अर्जुनका सब योद्धाओं और महारथियोंके साथ युद्ध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.62.22 
आददानस्य हि शरान् संधाय च विमुञ्चत:।
विकर्षतश्च गाण्डीवं न कश्चिद् ददृशे जन:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने जब बाण हाथ में लिया, उसे गाण्डीव धनुष पर चढ़ाया, प्रत्यंचा खींची और बाण छोड़ा, तब कोई भी मनुष्य नहीं देख सका ॥22॥
 
No human being could see when Arjuna took the arrow in his hand, placed it on the Gandiva bow, pulled the string and released the arrow. ॥22॥
 
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि अर्जुनसंकुलयुद्धे द्विषष्टितमोऽध्याय:॥ ६२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें अर्जुनके संकुलयुद्धसे सम्बन्ध रखनेवाला बासठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६२॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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