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श्लोक 13
श्लोक
4.62.13
शिरसां पात्यमानानामन्तरा निशितै: शरै:।
अश्मवृष्टिरिवाकाशादभवद् भरतर्षभ॥ १३॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! तीखे बाणों से कटे हुए योद्धाओं के सिरों की पंक्ति आकाश से गिरती हुई पत्थरों की वर्षा के समान प्रतीत हो रही थी।
O best of the Bharatas! The row of heads of the warriors cut off by sharp arrows in the middle looked like a shower of stones falling from the sky.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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