श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 61: अर्जुनका उत्तरकुमारको आश्वासन तथा अर्जुनसे दु:शासन आदिकी पराजय  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  4.61.5 
अस्त्राणामिव दिव्यानां प्रभाव: सम्प्रयुज्यताम्।
त्वया च कुरुभिश्चैव द्रवन्तीव दिशो दश॥ ५॥
 
 
अनुवाद
आपके और कौरव योद्धाओं द्वारा प्रयुक्त दिव्यास्त्रों का प्रभाव ऐसा है कि मुझे ऐसा प्रतीत होता है मानो दसों दिशाएँ भाग रही हैं ॥5॥
 
The effect of the divine weapons used by you and the Kaurava warriors is such that it appears to me that all the ten directions are running away. ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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