श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 61: अर्जुनका उत्तरकुमारको आश्वासन तथा अर्जुनसे दु:शासन आदिकी पराजय  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  4.61.43 
तत: पार्थमभिद्रुत्य दु:सह: सविविंशति:।
अवाकिरच्छरैस्तीक्ष्णै: परीप्सुर्भ्रातरं रणे॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर दुःसह और विविंशति युद्ध में अपने भाई से बदला लेने के लिए अर्जुन की ओर दौड़े और उस पर तीखे बाणों की वर्षा करने लगे ॥43॥
 
Then Dusaha and Vivinshati rushed towards Arjuna and began showering sharp arrows upon him, seeking to avenge their brother in battle. ॥43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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