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श्लोक 4.61.39  |
तस्य जिष्णुरुपावृत्य पृथुधारेण कार्मुकम्।
चकर्त गार्ध्रपत्रेण जातरूपपरिष्कृतम्॥ ३९॥ |
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| अनुवाद |
| तब अर्जुन ने उसकी ओर मुड़कर एक मोटी धार वाले तथा गिद्ध के समान पंख वाले बाण से दु:शासन का स्वर्ण धनुष काट डाला। |
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| Then Arjuna turned towards him and with an arrow having a thick edge and feathers like those of a vulture he cut off the golden bow of Dushasan. |
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