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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 61: अर्जुनका उत्तरकुमारको आश्वासन तथा अर्जुनसे दु:शासन आदिकी पराजय
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श्लोक 39
श्लोक
4.61.39
तस्य जिष्णुरुपावृत्य पृथुधारेण कार्मुकम्।
चकर्त गार्ध्रपत्रेण जातरूपपरिष्कृतम्॥ ३९॥
अनुवाद
तब अर्जुन ने उसकी ओर मुड़कर एक मोटी धार वाले तथा गिद्ध के समान पंख वाले बाण से दु:शासन का स्वर्ण धनुष काट डाला।
Then Arjuna turned towards him and with an arrow having a thick edge and feathers like those of a vulture he cut off the golden bow of Dushasan.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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