श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 61: अर्जुनका उत्तरकुमारको आश्वासन तथा अर्जुनसे दु:शासन आदिकी पराजय  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  4.61.33 
वैशम्पायन उवाच
एवमाश्वासितस्तेन वैराटि: सव्यसाचिना।
व्यवागाहद् रथानीकं भीमं भीष्माभिरक्षितम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! सव्यसाची अर्जुन द्वारा इस प्रकार सान्त्वना दिये जाने पर विराटकुमार उत्तर भीष्मजी द्वारा चारों ओर से सुरक्षित किये गये महारथियों की दुर्जेय सेना में घुस गये। 33॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! On thus being consoled by Savyasachi Arjuna, Viratakumar Uttara entered the formidable army of charioteers protected from all sides by Bhishmaji. 33॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas