श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 61: अर्जुनका उत्तरकुमारको आश्वासन तथा अर्जुनसे दु:शासन आदिकी पराजय  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  4.61.32 
धार्तराष्ट्रवनं घोरं नरसिंहाभिरक्षितम्।
अहमुत्पाटयिष्यामि वैराटे व्येतु ते भयम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मैं ही इस महाभयंकर कौरव वन को नष्ट करूँगा, जिसकी रक्षा वीर नरसिंहों द्वारा की जाती है; इसलिए हे विराटपुत्र! तुम्हारा भय दूर हो जाना चाहिए॥ 32॥
 
I alone will destroy this dreadful Kaurava forest, which is guarded by valiant human lions; therefore, O son of Virata, your fear must go away.'॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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