श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 61: अर्जुनका उत्तरकुमारको आश्वासन तथा अर्जुनसे दु:शासन आदिकी पराजय  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  4.61.31 
रौद्रं रुद्रादहं ह्यस्त्रं वारुणं वरुणादपि।
अस्त्रमाग्नेयमग्नेश्च वायव्यं मातरिश्वन:।
वज्रादीनि तथास्त्राणि शक्रादहमवाप्तवान्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
मैंने भगवान रुद्र से रौद्रास्त्र, वरुण से वरुणास्त्र, अग्नि से आग्नेयास्त्र और वायु देवता से वायव्यास्त्र सीखा है। इसी प्रकार मैंने स्वयं इंद्र से वज्र आदि अस्त्र प्राप्त किए हैं। 31॥
 
I have learned Raudrastra from Lord Rudra, Varunastra from Varuna, Agneyastra from Agni and Vayavyastra from Vayu Devta. Similarly, I have received weapons like Vajra etc. from Indra personally. 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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