श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 61: अर्जुनका उत्तरकुमारको आश्वासन तथा अर्जुनसे दु:शासन आदिकी पराजय  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.61.29 
ध्वजवृक्षं पत्तितृणं रथसिंहगणायुतम्।
वनमादीपयिष्यामि कुरूणामस्त्रतेजसा॥ २९॥
 
 
अनुवाद
‘कौरव सेना वन के समान है, जिसमें ध्वजाएँ वृक्ष हैं, पैदल सेना घास है और रथ सिंहों के स्थान पर हैं। आज मैं अपने शस्त्रों की अग्नि से इस कौरव वन को जलाकर राख कर दूँगा॥ 29॥
 
‘The Kaurava army is like a forest, in which the flags are the trees, the infantry is grass and the chariots are in place of the lions. Today I will burn this Kaurava forest to ashes with the fire of my weapons.॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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