vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 61: अर्जुनका उत्तरकुमारको आश्वासन तथा अर्जुनसे दु:शासन आदिकी पराजय
»
श्लोक 25
श्लोक
4.61.25
अहमिन्द्रस्य वचनात् संग्रामेऽभ्यहनं पुरा।
पौलोमान् कालखञ्जांश्च सहस्राणि शतानि च॥ २५॥
अनुवाद
पहले मैंने इन्द्र की आज्ञा से युद्ध में उसके शत्रु पौलोम और कालखंज नामक लाखों दैत्यों को मार डाला था॥ 25॥
Earlier, by the order of Lord Indra, I had killed in battle lakhs of demons named Pauloma and Kalakhanja, who were his enemies.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×