श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 61: अर्जुनका उत्तरकुमारको आश्वासन तथा अर्जुनसे दु:शासन आदिकी पराजय  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.61.23 
मया चक्रमिवाविद्धं सैन्यं द्रक्ष्यसि केवलम्।
इष्वस्त्रे शिक्षितं चित्रमहं दर्शयितास्मि ते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
‘तुम मेरे बाणों से घायल होकर चक्र के समान घूमती हुई सारी सेना को देखोगे। आज मैं तुम्हें धनुर्विद्या में प्राप्त अद्वितीय ज्ञान से परिचित कराऊँगा।॥23॥
 
‘You will see the entire army wounded by my arrows moving like a wheel. Today I will introduce you to the unique knowledge I have acquired in the art of archery.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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