श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 61: अर्जुनका उत्तरकुमारको आश्वासन तथा अर्जुनसे दु:शासन आदिकी पराजय  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.61.16 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा महाबाहुर्वैराटिं नरसत्तम:।
अर्जुनो रथिनां श्रेष्ठ उत्तरं वाक्यमब्रवीत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! इस प्रकार समझाकर महाबाहु अर्जुन, रथियों में श्रेष्ठ और पुरुषों में श्रेष्ठ, विराटपुत्र से पुनः ये वचन बोले -॥16॥
 
Vaishmpayana says: O King! After being explained in this manner, the mighty-armed Arjun, the best of charioteers and the best of men, again spoke these words to the son of Virata -॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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