श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 61: अर्जुनका उत्तरकुमारको आश्वासन तथा अर्जुनसे दु:शासन आदिकी पराजय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.61.1 
वैशम्पायन उवाच
ततो वैकर्तनं जित्वा पार्थो वैराटिमब्रवीत्।
एतन्मां प्रापयानीकं यत्र तालो हिरण्मय:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! इस प्रकार वैकर्तन कर्ण को पराजित करके अर्जुन ने विराटकुमार उत्तर से कहा - 'सारथी! तुम मुझे इस सेना के पास ले चलो, जिसकी ध्वजा पर सुवर्णमय ताड़वृक्ष का चिह्न है।'॥1॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Thus, after defeating Vaikartan Karna, Arjuna said to Viratkumar Uttar - 'Charioteer! You lead me to this army, whose flag has the symbol of a golden palm tree. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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