vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 60: अर्जुन और कर्णका संवाद तथा कर्णका अर्जुनसे हारकर भागना
»
श्लोक 3
श्लोक
4.60.3
अवोच: परुषा वाचो धर्ममुत्सृज्य केवलम्।
इदं तु दुष्करं मन्ये यदिदं ते चिकीर्षितम्॥ ३॥
अनुवाद
पहले तुमने धर्म की उपेक्षा करके बहुत कठोर वचन कहे थे, परन्तु जो तुम करना चाहते हो, उसे मैं तुम्हारे लिए बहुत कठिन समझता हूँ॥3॥
Earlier you had spoken very harsh words ignoring only Dharma, but I consider what you want to do to be very difficult for you. ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×