श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 60: अर्जुन और कर्णका संवाद तथा कर्णका अर्जुनसे हारकर भागना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.60.26 
तस्य भित्त्वा तनुत्राणं कायमभ्यगमच्छर:।
तत: स तमसाऽऽविष्टो न स्म किंचित् प्रजज्ञिवान्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वह बाण कर्ण के कवच को चीरता हुआ उसकी छाती में जा लगा, जिससे कर्ण मूर्छित हो गया और उसे कुछ भी होश नहीं रहा॥ 26॥
 
This arrow cut through Karna's armour and penetrated his chest. Due to this Karna fell unconscious and became unconscious of anything.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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