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mahabharat 4.60.25: तत्पश्चात् महाबली कुन्तीकुमार ने अग्नि के समान प्रज्वलित करने वाले अत्यन्त तेजस्वी दूसरे बाण से कर्ण की छाती में प्रहार किया॥25॥   |   mahabharat अध्याय 4.60: अर्जुन और कर्णका संवाद तथा कर्णका अर्जुनसे हारकर भागना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 60: अर्जुन और कर्णका संवाद तथा कर्णका अर्जुनसे हारकर भागना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  4.60.25 
अथापरेण बाणेन ज्वलितेन महौजसा।
विव्याध कर्णं कौन्तेयस्तीक्ष्णेनोरसि वीर्यवान्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली कुन्तीकुमार ने अग्नि के समान प्रज्वलित करने वाले अत्यन्त तेजस्वी दूसरे बाण से कर्ण की छाती में प्रहार किया॥25॥
 
Thereafter, the mighty Kuntikumar struck Karna in the chest with a second arrow of great brilliance and burning like fire. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)